झारखंड
राजकीय शोक के आदेश के बीच खुला सरकारी दफ्तर, हजारीबाग में सरकारी आदेश पर सवाल
7 सितंबर को सभी सरकारी कार्यालय बंद रखने का था स्पष्ट निर्देश, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल कार्यालय में चलता मिला कामकाज
हजारीबाग। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन के बाद राज्य सरकार ने 6 और 7 सितंबर को दो दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया था। सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग की ओर से 6 सितंबर 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि 7 सितंबर 2026 को राज्य सरकार के सभी कार्यालय बंद रहेंगे। इसके बावजूद हजारीबाग में एक सरकारी कार्यालय में कामकाज चलता मिला।
मामला ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, हजारीबाग कार्यालय का है। 7 सितंबर को जब सरकारी आदेश के अनुसार राज्य सरकार के सभी कार्यालय बंद रहने थे, उसी दिन इस कार्यालय के बाहर कई दोपहिया वाहन और सरकारी वाहन खड़े मिले। कार्यालय के अंदर भी कर्मचारी मौजूद थे और कामकाज जारी था।
जनदर्पण न्यूज़ 24 की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्यालय की स्थिति की तस्वीरें और वीडियो अपने कैमरे में रिकॉर्ड किए। कार्यालय के अंदर जाकर जब मौजूद कर्मियों से सवाल किया गया कि सरकार ने आज सभी सरकारी कार्यालय बंद रखने का आदेश दिया है, फिर कार्यालय क्यों खुला है, तो कर्मचारियों की ओर से जवाब दिया गया कि कोर्ट का प्रेशर है और ऊपर में काम करके आज ही देना है।
कर्मचारियों के इस जवाब के बाद सरकारी आदेश के अनुपालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकारी आदेश में क्या था?
झारखंड सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि मंत्री सुदिव्य कुमार का निधन 6 सितंबर 2026 की सुबह हुआ। उनके सम्मान में राज्य सरकार ने 6 और 7 सितंबर को दो दिवसीय राजकीय शोक मनाने का निर्णय लिया।
आदेश में स्पष्ट किया गया कि राजकीय शोक की अवधि में उन सभी सरकारी भवनों पर, जहां नियमित रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। साथ ही किसी भी प्रकार के राजकीय समारोह का आयोजन नहीं किया जाएगा।
इसी पत्र में सरकार की ओर से साफ तौर पर कहा गया है कि राज्य सरकार के सभी कार्यालय 7 सितंबर 2026 को बंद रहेंगे।
सरकार के इस स्पष्ट आदेश के बावजूद हजारीबाग स्थित ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल कार्यालय में कर्मचारियों की मौजूदगी और कामकाज सामने आने के बाद अब सवाल यह है कि आखिर इस कार्यालय को खोलने की अनुमति किस स्तर से मिली थी?
कोर्ट के काम का दिया गया हवाला
कार्यालय में मौजूद कर्मियों से जब इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने न्यायालय से संबंधित काम का हवाला दिया। उनका कहना था कि कोर्ट का प्रेशर है और ऊपर में काम करके आज ही देना है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि न्यायालय से संबंधित कोई अत्यावश्यक कार्य था, तो क्या इसके लिए कार्यालय खोलने की विशेष अनुमति दी गई थी? अगर अनुमति दी गई थी, तो क्या इसका कोई लिखित आदेश संबंधित कार्यालय को प्राप्त हुआ था?
वहीं, अगर ऐसी कोई विशेष अनुमति नहीं थी, तो फिर राज्य सरकार के स्पष्ट आदेश के बावजूद कार्यालय में कामकाज कैसे जारी रहा?
सरकारी आदेश और जमीनी हकीकत में अंतर
सरकार की ओर से जारी आदेश की भाषा काफी स्पष्ट है। इसमें 7 सितंबर को राज्य सरकार के सभी कार्यालयों को बंद रखने की बात कही गई है। ऐसे में हजारीबाग के ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल कार्यालय में कामकाज का जारी रहना सरकारी आदेश के पालन पर सवाल खड़ा करता है।
मौके पर कार्यालय के बाहर वाहनों की मौजूदगी और अंदर कर्मचारियों के काम करने की स्थिति कैमरे में रिकॉर्ड की गई। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कार्यालय में केवल ताला खोलकर कर्मचारी मौजूद नहीं थे, बल्कि वहां कामकाज किया जा रहा था।
अब जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से यह जानना जरूरी हो गया है कि राजकीय शोक के दिन कार्यालय में काम कराने का आदेश किसने दिया था?
क्या अत्यावश्यक कार्य के लिए थी छूट?
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यदि कोर्ट से जुड़े किसी जरूरी मामले में समय सीमा के भीतर दस्तावेज या रिपोर्ट भेजना अनिवार्य था, तो क्या सरकार ने ऐसे मामलों के लिए कार्यालयों को विशेष छूट दी थी?
यदि ऐसी कोई व्यवस्था थी तो उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी आदेश को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे। वहीं, यदि कोई विशेष छूट नहीं थी, तो सरकारी आदेश के बावजूद कार्यालय संचालन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
राजकीय शोक के दौरान सरकारी कार्यालय बंद रखने का आदेश सरकार के सर्वोच्च स्तर से जारी किया गया था। ऐसे में जिले के सभी संबंधित अधिकारियों और विभागों की जिम्मेदारी थी कि आदेश का पालन सुनिश्चित हो।
अब जवाब का इंतजार
हजारीबाग में सामने आए इस मामले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी आदेश के बावजूद ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल कार्यालय क्यों खुला था?
क्या विभाग के अधिकारियों को राजकीय शोक के आदेश की जानकारी नहीं थी? क्या न्यायालय से जुड़े कार्यों के लिए कार्यालय खोलने की अनुमति थी? यदि अनुमति थी, तो वह किस अधिकारी या विभाग ने दी? और यदि अनुमति नहीं थी, तो सरकारी आदेश की अनदेखी क्यों की गई?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और जिला प्रशासन की ओर से दिया जाना जरूरी है।
फिलहाल, सरकारी आदेश में कार्यालय बंद रखने का स्पष्ट निर्देश और उसी दिन हजारीबाग में सरकारी कार्यालय के अंदर चलता मिला कामकाज—दोनों तस्वीरें आमने-सामने हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है और सरकारी आदेश के अनुपालन को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है।
जनदर्पण न्यूज़ 24 की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई तस्वीरें और वीडियो इस पूरे मामले की हकीकत बयां कर रहे हैं।
